Upendra Dwivedi: Difference between revisions
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General '''Upendra Dwivedi''' PVSM AVSM (born 1 July 1964) is a serving four-star general officer of the Indian Army. He is the current and 30th Chief of the Army Staff. He took over as the 30th COAS succeeding General Manoj Pande on 30 June 2024. {{Template2|N1=General|N2=Upendra Dwivedi|N3=PVSM {{!}} AVSM|image=General Upendra Dwivedi, PVSM, AVSM (2024).jpg|image2=Indian Army.png|title1=30th Chief of the Army Staff|summary1=भारतीय थलसेना के वर्तमान 30वें सेनाध्यक्ष जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी जी अनुशासन, पराक्रम और दूरदर्शी नेतृत्व की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं। आदर्श विद्या मंदिर (विद्या भारती) के पूर्व छात्र के रूप में संस्कारों से दीक्षित, उन्होंने चार दशकों से अधिक की गौरवमयी सैन्य सेवा में सीमाओं की अभेद्य रक्षा से लेकर सेना के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण तक प्रत्येक दायित्व का निर्वहन अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अद्वितीय दक्षता के साथ किया है। राष्ट्रप्रथम की अडिग भावना, सैनिकों के कल्याण के प्रति करुण संवेदनशीलता तथा निर्णायक नेतृत्व उन्हें भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, प्रतिष्ठा और उज्ज्वल भविष्य—तीनों का सशक्त और प्रेरक प्रतिनिधि सिद्ध करते हैं।|title2=Personal details|Born=1 July 1964|Spouse=Sunita Dwivedi|Alma mater=Shishu Mandir,Satna {{!}} Sainik School, Rewa {{!}} National Defence Academy {{!}} Indian Military Academy {{!}} USAWC|title3=Military service|Branch/Service=Indian Army|Years of service=15 December 1984 – present|Rank=General|Unit=18 JAK RIF|Commands=Northern Command {{!}} IX Corps {{!}} IGAR (East) {{!}} 26 Sector AR {{!}} 18 JAK RIF|Service number=IC-42298W|Awards=Param Vishisht Seva Medal | General '''Upendra Dwivedi''' PVSM AVSM (born 1 July 1964) is a serving four-star general officer of the Indian Army. He is the current and 30th Chief of the Army Staff. He took over as the 30th COAS succeeding General Manoj Pande on 30 June 2024. {{Template2|N1=General|N2=Upendra Dwivedi|N3=PVSM {{!}} AVSM|image=General Upendra Dwivedi, PVSM, AVSM (2024).jpg|image2=Indian Army.png|title1=30th Chief of the Army Staff|summary1=भारतीय थलसेना के वर्तमान 30वें सेनाध्यक्ष जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी जी अनुशासन, पराक्रम और दूरदर्शी नेतृत्व की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं। आदर्श विद्या मंदिर (विद्या भारती) के पूर्व छात्र के रूप में संस्कारों से दीक्षित, उन्होंने चार दशकों से अधिक की गौरवमयी सैन्य सेवा में सीमाओं की अभेद्य रक्षा से लेकर सेना के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण तक प्रत्येक दायित्व का निर्वहन अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अद्वितीय दक्षता के साथ किया है। राष्ट्रप्रथम की अडिग भावना, सैनिकों के कल्याण के प्रति करुण संवेदनशीलता तथा निर्णायक नेतृत्व उन्हें भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, प्रतिष्ठा और उज्ज्वल भविष्य—तीनों का सशक्त और प्रेरक प्रतिनिधि सिद्ध करते हैं।|title2=Personal details|Born=1 July 1964|Spouse=Sunita Dwivedi|Alma mater=Shishu Mandir,Satna {{!}} Sainik School, Rewa {{!}} National Defence Academy {{!}} Indian Military Academy {{!}} USAWC|title3=Military service|Branch/Service=Indian Army|Years of service=15 December 1984 – present|Rank=General|Unit=18 JAK RIF|Commands=Northern Command {{!}} IX Corps {{!}} IGAR (East) {{!}} 26 Sector AR {{!}} 18 JAK RIF|Service number=IC-42298W|Awards=Param Vishisht Seva Medal, Ati Vishisht Seva Medal}}He was previously serving as the 46th Vice Chief of Army Staff. Earlier he was tenanting the appointment of General Officer Commanding-in-Chief Northern Command, prior to that he served as the Deputy Chief of the Army Staff (Information Systems and Coordination)and as the General Officer Commanding IX Corps. | ||
== Early life and education == | == Early life and education == | ||
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|30 June 2024 | |30 June 2024 | ||
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== जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी, PVSM | AVSM == | |||
=== पराक्रम, प्रज्ञा और राष्ट्रनिष्ठा का उज्ज्वल प्रतिमान === | |||
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=== भूमिका: सेनाध्यक्ष के रूप में दायित्व ग्रहण === | |||
30 जून 2024 को भारतीय थलसेना की सर्वोच्च कमान संभालने वाले जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी, राष्ट्र की रक्षा-परंपरा के ऐसे ध्वजवाहक हैं जिनका नेतृत्व साहस, अनुशासन और रणनीतिक सूझ-बूझ का सशक्त संगम है। इससे पूर्व फरवरी 2024 से उप-सेनाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने संगठनात्मक सुदृढ़ता, परिचालन तत्परता और तकनीकी आधुनिकीकरण को निर्णायक दिशा दी। परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक तथा तीन जीओसी-इन-सी प्रशस्ति-पत्र उनकी उत्कृष्ट सेवाओं की साक्षी हैं। | |||
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=== मूल और संस्कार: मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय मंच तक === | |||
मध्य प्रदेश की माटी में पले-बढ़े जनरल द्विवेदी ने सैनिक स्कूल, रीवा से शिक्षा प्राप्त की। अनुशासन, खेल-भावना और नेतृत्व उनके व्यक्तित्व के प्रारंभिक संस्कार रहे। जनवरी 1981 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश और 15 दिसंबर 1984 को जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 18वीं बटालियन में कमीशन—यहीं से उनके सैन्य जीवन की गौरवमयी यात्रा आरंभ हुई। | |||
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=== यौद्धिक देह-मन: खेल, शारीरिक प्रशिक्षण और उत्कृष्टता === | |||
विद्यालय काल से ही वे श्रेष्ठ खिलाड़ी रहे। एनडीए और आईएमए में ‘ब्लू’ (फिजिकल ट्रेनिंग) सम्मान प्राप्त कर उन्होंने शारीरिक दक्षता का उच्चतम मानदंड स्थापित किया। कमीशनिंग के पश्चात भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए फिजिकल ट्रेनिंग कोर्स में स्वर्ण पदक प्राप्त किया—यह उपलब्धि उनकी कठोर साधना और अनुशासित जीवन-शैली का प्रमाण है। | |||
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=== मैदान से मोर्चे तक: विविध थियेटरों में संतुलित अनुभव === | |||
उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी थियेटरों में संतुलित एवं व्यापक अनुभव—रेगिस्तान, उच्च हिमालयी क्षेत्र, नदीय भूभाग, शहरी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर—हर परिदृश्य में उनका नेतृत्व निर्णायक सिद्ध हुआ। कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवाद-रोधी अभियानों से लेकर राजस्थान के मरुस्थलों में परिचालन कमान तक, उन्होंने बटालियन का नेतृत्व किया। | |||
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=== आतंकवाद-रोधी अभियानों में अग्रणी भूमिका === | |||
इंस्पेक्टर जनरल असम राइफल्स (जीओसी) और सेक्टर कमांडर के रूप में उत्तर-पूर्व में तीव्र आतंकवाद-रोधी अभियानों का संचालन किया। भारत–म्यांमार सीमा प्रबंधन पर पहला व्यापक संकलन (कम्पेंडियम) तैयार कर उन्होंने सीमा-प्रबंधन के व्यावहारिक और नीतिगत आयामों को सुदृढ़ किया। | |||
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=== कोर से कमांड तक: रणनीति और संचालन === | |||
पश्चिमी मोर्चे पर ‘राइजिंग स्टार कोर’ और 2022–2024 के दौरान प्रतिष्ठित उत्तरी कमान का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रणनीतिक मार्गदर्शन और परिचालन पर्यवेक्षण प्रदान किया। उत्तरी एवं पश्चिमी सीमाओं पर सतत अभियानों की योजना और क्रियान्वयन, तथा जम्मू-कश्मीर में गतिशील आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों का समन्वय—उनके नेतृत्व की विशेषताएँ रहीं। | |||
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=== आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत === | |||
सेना की सबसे बड़ी कमान में आधुनिकीकरण को गति देते हुए उन्होंने स्वदेशी उपकरणों के समावेशन का मार्ग प्रशस्त किया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के अनुरूप स्वदेशी प्रणालियों की प्रेरित और सुव्यवस्थित इंडक्शन से क्षमताओं में ठोस वृद्धि हुई। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों के साथ समन्वय कर राष्ट्र-निर्माण और आधारभूत संरचना विकास को भी सशक्त किया। | |||
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=== स्टाफ और नीति-निर्माण में प्रभावी योगदान === | |||
पंजाब के मैदानी क्षेत्रों में बख्तरबंद ब्रिगेड की पारंपरिक संचालनात्मक जिम्मेदारियाँ, उत्तर-पूर्व में पर्वतीय डिवीजन को लॉजिस्टिक समर्थन, तथा रेगिस्तानी क्षेत्रों में स्ट्राइक कोर के संचालन—उनका स्टाफ अनुभव बहुआयामी रहा। सेना मुख्यालय में मिलिट्री सेक्रेटरी शाखा में उल्लेखनीय योगदान के साथ सैन्य संचालन निदेशालय में एक नए अनुभाग की स्थापना में उनकी भूमिका निर्णायक रही। | |||
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=== डीजी इन्फैंट्री से डिप्टी चीफ तक: क्षमता-वर्धन की गति === | |||
महानिदेशक (इन्फैंट्री) के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए हथियार प्रणालियों की पूंजीगत खरीद को तीव्रता दी, जिससे क्षमताओं में दृश्य और ठोस वृद्धि हुई। उप-सेनाध्यक्ष के रूप में स्वचालन, विशिष्ट तकनीकों का अवशोषण और संगठनात्मक दक्षता को नया आयाम मिला। | |||
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=== तकनीकी दूरदृष्टि: भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी === | |||
प्रौद्योगिकी-प्रेमी नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने बिग डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने पर बल दिया। उत्तरी कमान में सभी रैंकों की तकनीकी दहलीज बढ़ाने के उनके प्रयास भविष्य-सज्जित सेना की आधारशिला बने। | |||
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=== वैश्विक अनुभव और शैक्षणिक उत्कृष्टता === | |||
सोमालिया (यूएनओएसओएम-II) और सेशेल्स में सैन्य सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन किया। स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और उच्च कमान पाठ्यक्रम, महू के साथ यूएस आर्मी वॉर कॉलेज, कार्लाइल (यूएसए) में एनडीसी समकक्ष पाठ्यक्रम में ‘डिस्टिंग्विश्ड फेलो’ सम्मान प्राप्त किया। रक्षा एवं प्रबंधन अध्ययन में एम.फिल., तथा रणनीतिक अध्ययन और सैन्य विज्ञान में दो परास्नातक उपाधियाँ—उनकी विद्वत्ता का प्रमाण हैं। उन्होंने विभिन्न व्यावसायिक मंचों और जर्नलों में लेखन व प्रस्तुतियाँ भी दी हैं। | |||
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=== व्यक्तिगत जीवन: सेवा, संवेदना और साधना === | |||
श्रीमती सुनीता द्विवेदी, विज्ञान स्नातक, गृहिणी होने के साथ भोपाल स्थित विशेष क्षमता वाले बच्चों के संस्थान ‘आरुषि’ से जुड़ी हैं। उनकी दोनों पुत्रियाँ सामाजिक संगठनों के साथ कार्यरत हैं। जनरल द्विवेदी कुशल योगाभ्यासी हैं—देह, मन और कर्तव्य के संतुलन का सजीव उदाहरण। | |||
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=== उपसंहार: परंपरा से भविष्य तक === | |||
जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी का जीवन-यात्रा पराक्रम, प्रज्ञा और राष्ट्रनिष्ठा की अखंड धारा है। वे भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा के संरक्षक ही नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए उसे सशक्त बनाने वाले दूरदर्शी सेनानायक हैं—जिनके नेतृत्व में ‘राष्ट्रप्रथम’ केवल उद्घोष नहीं, बल्कि प्रतिदिन का कर्म है। | |||