Birsa Munda: Difference between revisions
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{{Template3|title=वनवासी हुतात्मा श्री बिरसा मुंडा|summary1= <b> वनवासी चेतना के अमर हुतात्मा, उलगुलान के महावीर</b> | {{Template3|title=वनवासी हुतात्मा श्री बिरसा मुंडा|summary1= <b> वनवासी चेतना के अमर हुतात्मा, उलगुलान के महावीर</b> | ||
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल नगरों, राजधानियों और शिक्षित वर्गों की कथा नहीं है। इस इतिहास की जड़ें वनों, पहाड़ों, जनजातीय अंचलों और धरती से जुड़े उन स्वाभिमानी समाजों में भी हैं, जिन्होंने अपने जल-जंगल-जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग को धर्म माना। ऐसे ही अमर हुतात्मा, वनवासी चेतना के प्रखर प्रतीक और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध जनजातीय महासंग्राम उलगुलान के नायक थे — श्री बिरसा मुंडा। {{photo | name= Shri Birsa Munda | image= Birsa-Munda-01.jpg | title2= Jharkhand}} | <h3> भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल नगरों, राजधानियों और शिक्षित वर्गों की कथा नहीं है। इस इतिहास की जड़ें वनों, पहाड़ों, जनजातीय अंचलों और धरती से जुड़े उन स्वाभिमानी समाजों में भी हैं, जिन्होंने अपने जल-जंगल-जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग को धर्म माना। ऐसे ही अमर हुतात्मा, वनवासी चेतना के प्रखर प्रतीक और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध जनजातीय महासंग्राम उलगुलान के नायक थे — श्री बिरसा मुंडा। {{photo | name= Shri Birsa Munda | image= Birsa-Munda-01.jpg | title2= Jharkhand}} | ||
जन्म, परिवेश और संस्कार | जन्म, परिवेश और संस्कार | ||
श्री बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को वर्तमान झारखंड की राजधानी राँची के समीप उलीहातु (कुछ स्रोतों में बम्बा क्षेत्र) में हुआ। छोटानागपुर का यह वनांचल क्षेत्र सदियों से मुंडा, उरांव, संथाल जैसे स्वाभिमानी वनवासी समाजों की मातृभूमि रहा है। बिरसा का बचपन प्रकृति की गोद में बीता — जहाँ जंगल जीवन का आधार थे और धरती माता पूज्या। | श्री बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को वर्तमान झारखंड की राजधानी राँची के समीप उलीहातु (कुछ स्रोतों में बम्बा क्षेत्र) में हुआ। छोटानागपुर का यह वनांचल क्षेत्र सदियों से मुंडा, उरांव, संथाल जैसे स्वाभिमानी वनवासी समाजों की मातृभूमि रहा है। बिरसा का बचपन प्रकृति की गोद में बीता — जहाँ जंगल जीवन का आधार थे और धरती माता पूज्या। | ||
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धर्मांतरण के षड्यंत्र | धर्मांतरण के षड्यंत्र | ||
भोली-भाली वनवासी युवतियों का शोषण | भोली-भाली वनवासी युवतियों का शोषण | ||
इन अत्याचारों ने बिरसा के अंतःकरण को झकझोर दिया। उनके भीतर सोया हुआ क्षत्रत्व जाग उठा। | इन अत्याचारों ने बिरसा के अंतःकरण को झकझोर दिया। उनके भीतर सोया हुआ क्षत्रत्व जाग उठा।</h3> | ||
उलगुलान : केवल विद्रोह नहीं, चेतना का महासंग्राम | उलगुलान : केवल विद्रोह नहीं, चेतना का महासंग्राम | ||
बिरसा मुंडा ने जिस आंदोलन का आह्वान किया, वह मात्र सशस्त्र विद्रोह नहीं था; वह एक सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण था, जिसे जनजातीय समाज ने उलगुलान—अर्थात महाविद्रोह कहा। | बिरसा मुंडा ने जिस आंदोलन का आह्वान किया, वह मात्र सशस्त्र विद्रोह नहीं था; वह एक सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण था, जिसे जनजातीय समाज ने उलगुलान—अर्थात महाविद्रोह कहा। | ||
Revision as of 12:43, 21 December 2025
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