Sanjay Kumar: Difference between revisions
Chief Editor (talk | contribs) Created page with "{{Heading1|title=मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) श्री संजय कुमार, पीवीसी}} '''Honorary Lieutenant (Subedar Major) Sanjay Kumar''' PVC (born 3 March 1976) is an Indian military officer, and recipient of the Param Vir Chakra, India's highest military award for his exemplary bravery during Kargil War. === Early life === Sanjay Kumar was born in village Kalol Bakain in Bilaspur District..." |
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{{Heading1|title=मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) श्री संजय कुमार, पीवीसी}} | {{Heading1|title=मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) श्री संजय कुमार, पीवीसी}}{{Template2|image2=Indian Army.png|image=Sanjay Kumar.png|N1=Honorary Lieutenant {{!}} Subedar Major|N2=Shri Sanjay Kumar|N3=Param Vir Chakra|title1=कारगिल युद्ध, मुष्कोह घाटी के अमर विजेता|summary1=कारगिल युद्ध, 1999 में मुष्कोह घाटी के पॉइंट 4875 (फ्लैट टॉप) पर, शत्रु की भीषण स्वचालित गोलीबारी के बीच राइफलमैन संजय कुमार ने असाधारण साहस, शीत-धैर्य और अदम्य संकल्प का परिचय दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने शत्रु के सुदृढ़ सैंगरों पर एकल धावा बोला, हाथों-हाथ की लड़ाई में कई शत्रु सैनिकों को निष्क्रिय किया और कब्ज़ाए गए हथियार से प्रभावी फायर कर आक्रमण की सफलता सुनिश्चित की। इस सर्वोच्च पराक्रम के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।|title2=Personal details|Born=3 March 1976|Spouse=Smt. Promila Sharma|Alma mater=Govt. Sr. Secondary School, Kalol|title3=Military service|Branch/Service=Indian Army|Years of service=26 June 1996 - present|Rank=Honorary Lieutenant {{!}} Subedar Major|Unit=13 JAK RIF|Commands=Conflicts: Kargil War|Service number=13760533|Awards=Param Vir Chakra}} | ||
'''Honorary Lieutenant (Subedar Major) Sanjay Kumar''' PVC (born 3 March 1976) is an Indian military officer, and recipient of the Param Vir Chakra, India's highest military award for his exemplary bravery during Kargil War. | |||
[[File:Param Vir Chakra.png|left|frameless|233x233px]] | |||
=== Early life === | === Early life === | ||
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Rifleman Sanjay Kumar displayed most conspicuous gallantry, cool courage and devotion to duty of an exceptionally high order in the face of the enemy.</blockquote> | Rifleman Sanjay Kumar displayed most conspicuous gallantry, cool courage and devotion to duty of an exceptionally high order in the face of the enemy.</blockquote> | ||
[[File:Sanjay Kumar03.jpg|thumb|303x303px|Subedar Sanjay Kumar is promoted to the rank of Subedar Major during the term as an instructor at National Defence Academy.]] | |||
[[File:Sanjay Kumar05.jpg|thumb|314x314px|Then Subedar Sanjay Kumar wearing the PVC medal at the first position of the medal tally.]] | |||
=== Awards and decorations === | === Awards and decorations === | ||
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=== | === In popular culture === | ||
Kumar's story along with others who were part of the same conflict was portrayed in the film ''LOC Kargil'', in which his character was played by famous Bollywood actor Sunil Shetty. | |||
Kumar was | === Legacy === | ||
A statue of Sub Maj Sanjay Kumar was unveiled at Param Yodha Sthal, Delhi with 20 other PVC Awardees. One of the Islands of Andaman and Nicobar has been renamed as Sanjay Dweep with other 20 PVC awardees on Parakram Diwas 23 January 2021. | |||
== मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) '''संजय कुमार''' , परमवीर चक्र == | |||
'''(मानद लेफ्टिनेंट | सूबेदार मेजर)''' | |||
'''13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स | भारतीय सेना''' | |||
=== | '''कारगिल युद्ध, 1999 – पॉइंट 4875 (मुष्कोह घाटी) के अमर विजेता''' | ||
'''मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) संजय कुमार''' भारतीय सेना के उन विरले परमवीर चक्र विजेताओं में हैं, जिन्होंने '''कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय)''' के दौरान '''4 जुलाई 1999''' को '''मुष्कोह घाटी''' के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र '''पॉइंट 4875 (फ्लैट टॉप)''' पर असाधारण शौर्य का परिचय दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने शत्रु की सुदृढ़ चौकियों को ध्वस्त कर लक्ष्य पर कब्ज़ा सुनिश्चित किया। उनके इसी '''अदम्य साहस, अद्वितीय व्यक्तिगत पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा''' के लिए उन्हें '''परमवीर चक्र''' से सम्मानित किया गया। | |||
=== प्रारंभिक जीवन एवं पृष्ठभूमि === | |||
संजय कुमार का जन्म '''3 मार्च 1976''' को '''बकैन गाँव''', '''बिलासपुर ज़िला (हिमाचल प्रदेश)''' में हुआ। वे '''श्री दुर्गा राम''' और '''श्रीमती भाग देवी''' के सुपुत्र हैं। प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर में पूर्ण करने के बाद वे दिल्ली चले गए। साधारण ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े संजय कुमार के भीतर अनुशासन, परिश्रम और देशसेवा का संकल्प प्रारंभ से ही दृढ़ था। | |||
=== सेना में प्रवेश === | |||
उन्होंने '''26 जून 1996''' को भारतीय सेना जॉइन की और '''13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स (13 JAK RIF)''' में नियुक्त हुए। यह रेजिमेंट अपने साहस, बलिदान और दुर्गम क्षेत्रों में लड़ने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। कारगिल संघर्ष में 13 JAK RIF ने अभूतपूर्व वीरता का प्रदर्शन किया। | |||
=== कारगिल युद्ध, 1999: पॉइंट 4875 (फ्लैट टॉप) की ऐतिहासिक लड़ाई === | |||
'''पॉइंट 4875''' सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि यहाँ से '''राष्ट्रीय राजमार्ग NH-1A''' पर निगरानी संभव थी। | |||
'''4 जुलाई 1999''' को, '''राइफलमैन संजय कुमार''' को '''फ्लैट टॉप''' पर आक्रमण करने वाली टुकड़ी के '''अग्रिम स्काउट''' के रूप में चुना गया। | |||
* जैसे ही आक्रमण आगे बढ़ा, शत्रु की '''स्वचालित गोलीबारी''' ने टुकड़ी की गति रोक दी। | |||
* स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, संजय कुमार ने '''व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना''' शत्रु के '''पहले सैंगर (बंकर)''' पर धावा बोला। | |||
* '''हाथों-हाथ की लड़ाई''' में उन्होंने '''तीन शत्रु सैनिकों को मार गिराया''', यद्यपि वे स्वयं '''गंभीर रूप से घायल''' हो गए। | |||
* घायल अवस्था में भी वे नहीं रुके और '''दूसरे सैंगर''' पर आक्रमण किया। | |||
* अचानक हुए इस प्रहार से शत्रु घबरा गया और एक '''यूनिवर्सल मशीन गन (UMG)''' छोड़कर भागने लगा। | |||
* संजय कुमार ने वही हथियार उठाकर '''भागते शत्रु पर फायर''' किया। | |||
* अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद उन्होंने '''निकासी से इनकार''' किया और आगे बढ़ते रहे। | |||
उनकी इस '''अलौकिक वीरता और दृढ़ संकल्प''' से प्रेरित होकर उनकी टुकड़ी ने कठिन भू-भाग की परवाह किए बिना धावा बोला और '''फ्लैट टॉप''' पर कब्ज़ा कर लिया। | |||
=== परमवीर चक्र === | |||
राइफलमैन संजय कुमार ने शत्रु के सामने '''अत्यंत विशिष्ट एवं असाधारण वीरता, अदम्य साहस, शीत साहस (cool courage) और कर्तव्य के प्रति सर्वोच्च निष्ठा''' का परिचय दिया। उनके इसी पराक्रम के लिए उन्हें '''परमवीर चक्र''' से सम्मानित किया गया। | |||
=== सेवा-उत्तर जीवन === | |||
संजय कुमार भारतीय सेना में निरंतर सेवा करते हुए '''सूबेदार मेजर''' के पद तक पहुँचे। '''फरवरी 2022''' में उन्हें यह पद प्राप्त हुआ और बाद में उन्हें '''मानद लेफ्टिनेंट''' की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने '''राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), पुणे''' में प्रशिक्षक के रूप में भी योगदान दिया—जहाँ वे भावी सैन्य नेतृत्व को साहस और अनुशासन का जीवंत उदाहरण प्रदान करते रहे। | |||
=== स्मारक एवं विरासत === | |||
* '''राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली''' में उनकी प्रतिमा/बस्ट स्थापित। | |||
* सैन्य साहित्य, वृत्तचित्रों, कॉमिक्स और फ़िल्म '''“LOC कारगिल”''' में उनकी गाथा। | |||
* वे आज भारतीय सेना के '''जीवित परमवीर चक्र विजेताओं''' में से एक हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। | |||
मानद लेफ्टिनेंट (सूबेदार मेजर) संजय कुमार का जीवन यह सिद्ध करता है कि '''सच्ची वीरता पद या हथियारों की नहीं, बल्कि संकल्प और कर्तव्य की उपज होती है'''। घायल शरीर के बावजूद लक्ष्य प्राप्ति तक आगे बढ़ना—यह उनकी अमर पहचान है, जो आने वाली पीढ़ियों को '''राष्ट्रप्रेम, साहस और अडिग इच्छाशक्ति''' का संदेश देती रहेगी। | |||